दक्षिण पूर्व एशिया एवं भारत की वाणिज्यिक स्थिति

10 Apr

Authors: अनुप्रिया

Abstract: किसी भी देश की प्रगति उसके व्यापार पर निर्भर करती है इस दृष्टि से भारत ने प्राचीन काल से ही व्यापार के क्षेत्र में बहुत उन्नति की थी जिसके कारण वह विश्व का एक प्रमुख देश बन गया था। यहाँ की उर्वरा भूमि उपयुक्त जलवायु और प्राकृतिक साधनों की प्रचुरता ने इसमें अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। "यहाँ के लोग भी बड़े परिश्रमी और साहसी थे जिन्होंने अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए अपना व्यापार न केवल भारतवर्ष तक सीमित रखा अपितु उसे विश्व के अन्य देशों में भी फैलाया। इस प्रकार अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की नींव पड़ी। प्रारम्भ में तो यह व्यापार वस्तु विनिमय प्रणाली पर आधारित था किन्तु कालान्तर में उसकी आवश्यकताएं बढ़ती गई तो मुद्रा प्रणाली का विकास हुआ जिसके परिणामस्वरूप आन्तरिक तथा विदेशी व्यापार में प्रगति हुई।

DOI: https://doi.org/10.5281/zenodo.19500201