राजनीतिक चिंतन, सुशासन और लोकनीति के परिप्रेक्ष्य में थारू जनजाति की पंचायती राज व्यवस्था में सहभागिता

31 Mar

Authors: Sangh Ratan Gautam, Dr. Rakesh Kumar Jaiswal

Abstract: यह शोध-पत्र राजनीतिक चिंतन, सुशासन और लोकनीति के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक आयामों के संदर्भ में थारू जनजाति की पंचायतीराज संस्थाओं में सहभागिता का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन का भौगोलिक क्षेत्र उत्तराखंड राज्य के ऊधम सिंह नगर जनपद का खटीमा विकास खंड है, जहाँ थारू समुदाय की उल्लेखनीय जनसंख्या निवास करती है। 73वें संविधान संशोधन के पश्चात स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुई, जिससे अनुसूचित जनजातियों के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण सुनिश्चित हुआ। इस अध्ययन में अनुभवजन्य पद्धति का प्रयोग करते हुए 100 उत्तरदाताओं से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन के निष्कर्ष दर्शाते हैं कि पंचायती राज व्यवस्था नें थारू समुदाय को राजनीतिक मंच प्रदान किया है, परंतु वास्तविक निर्णय निर्माण प्रक्रिया में उनकी प्रभावशीलता अभी भी सीमित है। सुशासन के तत्व-पारदर्शिता, जवाबदेही, सहभागिता और विधि का शासन आंशिक रूप से परिलक्षित होते हैं। लोकनीतियों के क्रियान्वयन में पंचायतों की भूमिका महत्वपूर्ण है, किंतु प्रशासनिक जटिलताएं और सामाजिक संरचनातमक बाधाएँ सशक्तिकरण की गति को प्रभावित करती है। अध्ययन अंततः नीतिगत सुझाव प्रस्तुत करता है, जो जनजातीय राजनीतिक विकास की दिशा में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

DOI: https://doi.org/10.5281/zenodo.19352271