Authors: आशीष यादव
Abstract: खेल को जीवन का अभिन्न अंग माना जाता है तथा खिलाड़ी को" समाज का। खेल से जहाँ एक ओर शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक स्थिति में सुधार होता है, वहीं दूसरी ओर मानवीयता के गुण, सहयोग की भावना तथा आपसी संबंधों में सुधार होता है। खेल से कुशलता का विकास होता है। खिलाड़ी अपने खेल को बेहतर बनाने और जीतने की रणनीतियों और प्रशिक्षित करने के तरीकों का उपयोग करके तकनीक का ज्ञान प्राप्त करते हैं। शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में अनेक प्रकार के खेलों को अधिक से अधिक शामिल किया जा रहा है। खेल शारीरिक ही नहीं मनोवैज्ञानिक क्रिया है, इसीलिए खिलाड़ियों के खेल मनोविज्ञान का अध्ययन कराया जाता है। खेल मनोविज्ञान, मनोविज्ञान की एक शाखा है जो यह प्रशिक्षण देती है कि प्रतिस्पर्धा से पहले खिलाड़ी बेहतर तरीके से सोचने और काम करने के तरीके को विकसित करके अपने प्रदर्शन में सुधार कैसे कर सकते हैं। खेल मनोविज्ञान प्रशिक्षक और खिलाड़ी दोनों को प्रेरणा प्रदान करने के लिए उपयोग कर सकते हैं। खेल मनोविज्ञान, खेल मानसिकता का अध्ययन करता है जबकि खेल मानसिकता, खेल भावना और प्रतियोगिता में सहायक का काम करता है।