Authors: डॉ बबिता
Abstract: 21वीं सदी में वैश्वीकरण और डिजिटलीकरण ने भारतीय सामाजिक संरचना में व्यापक एवं तीव्र गति से परिवर्तन कर रहा है । जिससे भारत जैसे विविधतापूर्ण समाज (बहु-संस्कृतियों) में सांस्कृतिक- मूल्यों, शिक्षा, आर्थिक अवसर, परिवार, विवाह, धर्म एवं सामाजिक संबंधों में तेजी से बदलाव हो रहा है। वैश्वीकरण एवं डिजिटलीकरण ने विश्व को एक ‘वैश्विक गांव’ में बदल दिया है। वर्तमान भारत की सामाजिक संरचना में इन प्रक्रियाओं ने संयुक्त परिवार को एकल परिवार में तीव्र रूप से वृद्धि किया है। जनगणना 2011 में एकल परिवारों की संख्या 51.7% से 52.01% रही, जो एकल परिवारों की वृद्धि को दर्शाता है। जातिगत बंधन ढीले पड़ रहे हैं। यह परिवर्तन व्यक्तिवाद, उपभोक्तावाद, डिजिटल साक्षरता और शहरीकरण को बढ़ावा दे रहा है, लेकिन साथ ही डिजिटल विभाजन, मानसिक तनाव, सांस्कृतिक समरूपता और ग्रामीण-शहरी असमानता जैसी चुनौतियां भी उत्पन्न कर रहा है। भारत में 1991 ई. के आर्थिक उदारीकरण के बाद वैश्वीकरण की प्रक्रिया तेज हुई है। इसके साथ इंटरनेट, स्मार्टफोन और डिजिटल प्लेटफार्म के प्रसार ने समाज के विविध क्षेत्रों में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए है। यह शोध पत्र द्वितीय स्रोतों जैसे पुस्तकें, शोध पत्र, सरकारी रिपोर्ट और डिजिटल डाटा पर आधारित है। इस शोध -पत्र का मुख्य उद्देश्य भारतीय सामाजिक संरचना पर वैश्वीकरण और डिजिटलीकरण के प्रभाव का समाजशास्त्रीय विश्लेषण करना है।
DOI: https://doi.org/10.5281/zenodo.19449703