आज के सामाजिक परिवेश में डिजिटल बाल साहित्य की अवधारणा

3 Apr

Authors: अर्चना तिवारी, डॉ. वंदना

Abstract: डिजिटल बाल साहित्य से आशय उस साहित्यिक सामग्री से है, जो बच्चों के लिए डिजिटल माध्यमों के द्वारा सृजित, प्रकाशित एवं प्रसारित की जाती है। इसमें ई-पुस्तकें, ऑनलाइन कहानियाँ, डिजिटल पत्रिकाएँ, शैक्षिक वेबसाइटें, मोबाइल एप्लिकेशन, श्रव्य-दृश्य कथाएँ, एनिमेटेड कहानियां तथा संवादात्मक कथानक सम्मिलित होते हैं। जो प्रबुद्ध जन के साथ-साथ बाल मन को भी आकर्षित करते है। यह शोध पत्र समाजिक परिवेश में डिजिटल बाल साहित्य की भूमिका का विश्लेषण करता है।इस अध्ययन का केन्द्र विन्दु डिजिटल बाल साहित्य है। आज के सामाजिक परिवेश मे डिजिटल साधनो ने तीव्र गति से बाल पाठक को अपनी तरफ आकर्षित किया है। आज कल बच्चे किताबो, पत्र -पत्रिकाओं के लिखित संस्करण को छोडकर उसके इलेक्ट्रानिक रूपांतरण की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। डिजिटल बाल साहित्य दृश्य-श्रव्य तत्वों से युक्त एक नवीन साहित्यिक अभिव्यक्ति है,जो वर्तमान समय में बच्चो की बदलती रुचियो और जिज्ञासाओं के अनुरूप विकसित हो रहा है। इस शोध पत्र का व्यापक उद्देश्य इस विन्दु का विश्लेषण करना है कि किस प्रकार डिजिटल बाल साहित्य बच्चों के समाजिक परिवेश, नैतिक एवं सामाजिक,सांस्कृतिक मूल्यों को विकसित करने में सक्रिय है या फिर केवल वाह्य रूप से उनका मनोरंजन करने में सहायक है। आज चका-चौध की रंगीन दुनियां में बच्चे किताबो को छोड़कर मोबाइल इन्टरनेट , ई. बुक, वेबसाइट और एप्स की तरफ आकर्षित हो रहे है । साहित्य केवल पाठ्य पुस्तको तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि चित्र, ध्वनि, श्रव्य-दृश्य साधनो आदि के माध्यम से बच्चों के भावात्मक, बौद्धिक एवं नैतिक विकास में सहायक बना है। विभिन्न प्रकार के डिजिटल मंचों पर उपलब्ध कथाएँ बच्चो को विविध समाजिक अनुभवों, मूल्यों और सामाजिक समस्याओं से परिचित कराती है। यह शोध इस तथ्य का प्रतिपादन करता है कि डिजिटल बाल साहित्य आज के सामाजिक परिवेश में केवल मनोरंजन का साधन न रहकर व्यवहारिक रूप से आने वाली पीढ़ी में सामाजिक चेतना एवं मूल्यबोध के विकास का एक प्रभावशाली माध्यम है।

DOI: https://doi.org/10.5281/zenodo.19449794