लैंगिक समानता और युवा अधिकार: भारतीय परिप्रेक्ष्य में (चुनौतियां, नीतियां एवं सम्भावनाएं)

7 Apr

Authors: सीमा शोधार्थी

Abstract: सारांश यह शोध-पत्र भारतीय परिप्रेक्ष्य में लैंगिक समानता एवं युवा अधिकारों की अवधारणा का अध्ययन करता है तथा उनसे संबंधित चुनौतियों, नीतियों एवं भविष्य की संभावनाओं का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन में लैंगिक असमानता के विभिन्न आयामों जैसे शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक भागीदारी, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच तथा सामाजिक-सांस्कृतिक भेदभाव का विश्लेषण किया गया है। साथ ही, युवा अधिकारों की अवधारणा एवं उनके संवैधानिक आधार को स्पष्ट करते हुए यह बताया गया है कि समानता, स्वतंत्रता एवं शिक्षा जैसे अधिकार युवाओं के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। यद्यपि भारत में अनेक नीतियां एवं योजनाएं लागू की गई हैं, फिर भी पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचना, जागरूकता की कमी, आर्थिक विषमता, सामाजिक कुरीतियाँ एवं डिजिटल विभाजन जैसी समस्याएं अभी भी प्रगति में बाधा उत्पन्न करती हैं। इस शोध-पत्र में 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' योजना, राष्ट्रीय युवा नीति तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 जैसी प्रमुख सरकारी पहलों का विश्लेषण किया गया है, जो लैंगिक समानता एवं युवा सशक्तिकरण को बढ़ावा देती हैं। इसके अतिरिक्त, शिक्षा, डिजिटल तकनीक, सामाजिक जागरूकता, नीतिगत सुधार एवं युवाओं की सक्रिय भागीदारी को भविष्य की संभावनाओं के रूप में प्रस्तुत किया गया है। अध्ययन के निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि लैंगिक समानता एवं युवा अधिकारों की सुनिश्चितता भारत के सतत एवं समावेशी विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए सरकार, समाज एवं युवाओं के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है, ताकि एक समतामूलक, न्यायपूर्ण एवं समावेशी समाज की स्थापना की जा सके।

DOI: https://doi.org/10.5281/zenodo.19449223