भारतीय समाज के कुटीर उद्योगों का वैश्विक परिप्रेक्ष्य में अध्ययन

7 Apr

Authors: निशा, डॉ. शिवराम सिंह Abstract: यह अध्ययन भारतीय समाज के कुटीर उद्योगों का वैश्विक परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण प्रस्तुत करता है। कुटीर उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था की पारंपरिक तथा श्रमप्रधान संरचना का महत्वपूर्ण अंग रहे हैं, जो ग्रामीण रोजगार सृजन, आत्मनिर्भरता, … Read More »

साहित्य, भाषा और साहित्यिक आलोचना (शास्त्रीय, आधुनिक और समकालीन)

7 Apr

Authors: डॉ. राजेश कुमार Abstract: साहित्य मानव समाज का दर्पण है। साहित्य और भाषा का संबंध अत्यंत घनिष्ठ एवं अविच्छेद्य है। जहाँ भाषा अभिव्यक्ति का माध्यम है, वहीं साहित्य उस अभिव्यक्ति का कलात्मक तथा सुव्यवस्थित रूप प्रस्तुत करता है। भाषा … Read More »

रोहिलखण्ड में स्थापत्य का संक्रमण: रोहिला नवाबी शैली से ब्रिटिश औपनिवेशिक वास्तुकला (1740-1900 ई0) तक

7 Apr

Authors: साक्षी राठौर, डॉ० विजय प्रताप सिंह Abstract: प्रस्तुत शोध पत्र 18वीं शताब्दी के मध्य रोहिलखण्ड क्षेत्र में घटित स्थापत्य रूपांतरण की प्रक्रियाओं का ऐतिहासिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में बहुआयामी विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह अध्ययन इस तथ्य … Read More »

लैंगिक समानता और युवा अधिकार: भारतीय परिप्रेक्ष्य में (चुनौतियां, नीतियां एवं सम्भावनाएं)

7 Apr

Authors: सीमा शोधार्थी Abstract: सारांश यह शोध-पत्र भारतीय परिप्रेक्ष्य में लैंगिक समानता एवं युवा अधिकारों की अवधारणा का अध्ययन करता है तथा उनसे संबंधित चुनौतियों, नीतियों एवं भविष्य की संभावनाओं का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन में लैंगिक असमानता के … Read More »

आधुनिक भारतीय समाज में लैंगिक भेदभाव

7 Apr

Authors: शालू गुप्ता Abstract: यह शोधपत्र भारतीय संदर्भ में लैंगिक भेदभाव की समस्या का विश्लेषण करता है। ‘लिंग’ से आशय उन सामाजिक और आर्थिक भूमिकाओं से है जो समाज पुरुषों और महिलाओं को प्रदान करता है। समाज किस प्रकार दोनों … Read More »

समकालीन हिंदी कविता में स्त्री विमर्श: अस्मिता, प्रतिरोध और सौंदर्यशास्त्र

7 Apr

Authors: डॉ पूनम सिंह Abstract: यह लेख समकालीन हिंदी कविता के विस्तृत फलक पर स्त्री विमर्श के सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक विकास की समीक्षा करता है। बींसवीं सदी के उत्तरार्ध से लेकर वर्तमान तक हिंदी कविता के पितृसत्तात्मक समाज को चुनौती … Read More »

भारत मे वर्तमान वैश्विक चुनौतियाँ और उभरते विमर्श:

7 Apr

Authors: डॉ॰ सरिता भारती, डॉ॰ विनोद कुमार Abstract: वर्तमान परिदृश्य में, भारत एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है, लेकिन उसे जटिल और बहुआयामी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। भारत को चीन तथा पाकिस्तान … Read More »

बच्चों के व्यक्तित्व विकास और नैतिक मूल्यों के निर्माण में पारिवार की भूमिका : एक तुलनात्मक अध्ययन

7 Apr

Authors: सरला देवी Abstract: परिवार समाज की सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण संस्थाओं में एक है, जो बच्चों के व्यक्तित्व विकास तथा नैतिक मूल्यों के निर्माण में अपनी केंद्रीय भूमिका निभाती है। आधुनिक युग में वैश्वीकरण, शहरीकरण और तकनीकी परिवर्तन के … Read More »

भूमण्डलीकरण के युग में जलवायु परिवर्तन से निपटने में भारतीय ज्ञान प्रणाली और राष्ट्रीय नीति का समन्वयात्मक अध्ययन

7 Apr

Authors: विवेक कुमार Abstract: वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन वैश्विक स्तर पर मानव समाज और प्राकृतिक पारिस्थितिकी के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में सामने खड़ी है। औद्योगिकीकरण, तीव्र शहरीकरण तथा संसाधनों के अनियंत्रित दोहन के कारण पर्यावरणीय संतुलन … Read More »